समाचार पत्र
   मेरा जन्म छोटे से  गाँव मे हुआ था, अतः वहाँ पे समाचार पत्र कभी कबार ही पहोचते  थे ! आज तो कई लोगो सुबह की चाय समाचार पत्र के बीना गले नीचे उतरती ही नहीं हे|  पहेली बार समाचारपत्र १९८४  के अक्तूबर मे देखा था
  समाचारपत्र एक साथ नया या तो उनके अनुरूप विचार घर घर तक पहोच देता  हे । वैचारिक क्रांति लाने मे समाचार पत्र सबसे श्रेष्ठ माध्यम हे । अगले कुछ दिनो से मे हर रोज दिव्य भास्कर को देखता हु तो ये अखबार ने पानी को बचाने की बहोत बढ़िया मुहिम छेड़ राखी हे। मेरे ख्यास से इस मुहिम से कई लोकोने अपने  जीवन व्यवहार मे बदलाव  लाके पानी  को बचाना शुरू कर दिया हे।
   प्राचीन समय मे लोक संस्कृतिका विकास नदियां केआर किनारे हुआ करता था या फिर सहजता से पानी प्राप्य हो वहाँ पे लोग बस जाते थी, जब वहाँ पे पनि नहीं रहा तो  लोगो का पलायन शुरू हो गया फिर आसियाने उज्ज्ड़ गए।  
  अखबार हमारे सामने पानी  जेसी  कई सांप्रत परिस्थितियां  का चितार दिखाके  आने वाले मुश्किल दिनो  से बचाने की नई राह दिखा शकते हे।
  आज इलोक्त्रोनिक मिडियाके बढ़ावेके बावजूद भी प्रिंट मीडिया अपना अविचल स्थान बनाए हुए हे।
लेखन :कांतिलाल रूपाभाई परमार 
31/03/2018
साम 5;20

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